स्वाध्याय योग युक्तात्मा परमात्मा प्रकाशते। अर्थात स्वाध्याययुक्त साधना से ही परमात्मा का साक्षात्कार होता है ।—महर्षि व्यास

संस्कारों की व्यवस्था

ॠषियों की तपस्थली, गायत्री तपोभूमि, मथुरा में संस्कार कराने की निःशुल्क व्यवस्था की गई है।  जो लोग संस्कार कराने यहाँ नहीं आ सकते हैं,  वे फोन, ईमेल या पत्र से अपने जन्मदिन, विवाह दिन की सूचना देते हैं तो उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए अखंड अग्नि की यज्ञशाला में आहुतियाँ डलवाई जाती हैं। परिवार में कोई बहुत अस्वस्थ हो उसके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना से आहुतियाँ डलवाई जाती हैं। किसी की मृत्यु होने पर उसकी आत्मशांति हेतु आहुतियाँ डलवाई जाती हैं। इसकी सूचना समय से देनी चाहिए।

प्रमुख संस्कार, जो गायत्री तपोभूमि में संपन्न करवाए जाते हैं -

- पुंसवन संस्कार

- नामकरण संस्कार

- अन्नप्राशन संस्कार

- मुंडन संस्कार

- विद्यारंभ संस्कार

- यज्ञोपवीत संस्कार

- दीक्षा संस्कार

- वानप्रस्थ संस्कार

- जन्मदिवस संस्कार

- विवाह दिवस संस्कार

- तर्पण संस्कार

गायत्री तपोभूमि दिव्य तीर्थभूमि है, गायत्री शक्ति का सिद्धपीठ है, अतः यहाँ संस्कार कराने के लिए मुहूर्त विशेष को देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती, प्रतिदिन संस्कार होते हैं, पर्व-त्योहारों पर संस्कार कराने वालों की संख्या अधिक बढ़ जाती है।

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