स्वयं को जीवन के श्रेष्ठ मूल्यों के लिए प्रेरित करें ।
युग साहित्य का स्वाध्याय एवं सत्संग करें ।
ज्ञान आचरण में कितना उतरा ? समीक्षा करें ।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा एवं विद्यालयों में संस्कृति मंडल का गठन ।
(3) स्वास्थ्य— रुग्णता रोकने के उपाय जीवनशैली में परिवर्तन कर विकसित करना, इस आंदोलन का उद्देश्य है —
सुख को स्वास्थ्य पर हावी न होने दें ।
स्वास्थ्य के सूत्रों को अभ्यास में लाएँ ।
आहार-विहार, चिंतन, चरित्र, श्रम, विश्राम का संतुलन बनाएँ ।
योग, व्यायाम, प्राणायाम आदि को दिनचर्या में लाएँ ।
संयम बरतें एवं जड़ी-बूटी चिकित्सा अपनाएँ ।
स्वच्छता बढ़ाएँ ।
शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्यों को साधें ।
(4) स्वावलंबन —
हमारे कृषि प्रधान देश में आर्थिक क्रांति ग्राम केंद्रित करके बनाई गई योजनाओं द्वारा ही आएगी ।
स्वावलंबन की मनोवृत्ति ।
श्रम का सम्मान ।
स्वयं सहायता, बचत समूह, कुटीर उद्योग, ग्रामोद्योग, गोपालन ।
कमजोर वर्ग का शोषण न हो, श्रम और कौशल का लाभ मिले । समझदार और समर्थ उन्हें प्रेरणा दें ।
(5) पर्यावरण — हरीतिमा-संवर्द्धन और कचरे की व्यवस्था ।
प्रकृति के यज्ञीय चक्र (इकोलॉजिकल बैलेंस) के प्रति आस्था, अनगढ़ सुख-व्यसन, फैशन के लिए प्रकृति पर चोट न हो ।
कचरे का निस्तारण ।
दैवी आपदाएँ, बाढ़, भूकंप, दुर्भिक्ष को कम करने के लिए वृक्ष लगाना, यज्ञ द्वारा प्रदूषण को कम करना, शिक्षकों, छात्रों को प्रशिक्षण, स्मृति उपवन की स्थापना ।
सामाजिक जागरूकता, प्रशिक्षण एवं व्यवस्था तंत्र विकसित करें ।
(6) नारी जागरण — महिलाओं में आत्मगौरव का जागरण उनका परिपूर्ण शिक्षण ।
योग्यता का विकास
स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वावलंबन, सुरक्षा और सुसंस्कार
आत्मगौरव का बोध, आत्मविश्वास
सोने की जंजीरों से मुक्ति ।
बेटा-बेटी को एक जैसा मानें
बेटी-बहू का अंतर मिटे
नारी की नारी के प्रति संवेदना जागे ।
क्षेत्रीय नारी संगठन बनें-नारी को आगे बढ़ाएँ ।
जगह-जगह सार्थक आयोजन हों, जिनकी पूरी व्यवस्था महिलाएँ सँभालें ।
(7) व्यसन मुक्ति, कुरीति उन्मूलन—तंबाकू, शराब, पान मसाला, गुटखा, मादक औषधियों का प्रचलन रोकें ।
‘व्यसन से बचाएँ-सृजन में लगाएँ, युवाशक्ति को राष्ट्रनिर्माण में लगाएँ ।
कुरीतियों, व्यसनों से समय, श्रम, साधन, स्वास्थ्य बचाएँ, सृजन में लगाएँ ।
त्याज्य परंपराएँ क्यों पनप रही हैं, विचार करें ।
उपजाति का भेद मिटे ।
भिक्षा व्यवसाय समाप्त हो ।
मृतक भोज, जेवर का प्रचलन बंद हो, दहेज, फजूलखरची जैसी कुरीतियाँ बंद हों ।
व्यसनों से हानि का बोध ।
साधना से संकल्प ।
औषधियों और सामाजिक दबाव का प्रयोग हो ।
महिलाओं-बच्चों को प्रेरित करें, सत्याग्रह करें ।
विद्यालयों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, संप्रदायों को प्रेरित, सक्रिय करें ।