सप्तक्रांतियाँ

(1) साधना— साधना ही युग निर्माण मिशन का मूल प्राण है । इसी आधार पर गायत्री परिवार खड़ा है ।

  • जीवन साधना से जोड़कर स्वाध्याय, संयम, सेवा में लगना ।
  • मंत्र जप, मंत्र लेखन, संस्कार, देवस्थापना, बलिवैश्व यज्ञ, धार्मिक आयोजन, तुलसी आरोपण आदि प्रत्येक व्यक्ति करे ।
  • परमपूज्य गुरुदेव द्वारा कराई गई विभिन्न ध्यान-साधनाओं में से किसी एक को गहराई में उतारें । 


(2) शिक्षा— ऐसे आंदोलन के रूप में गति दिया जाना है, जिसमें  न  केवल समूचा राष्ट्र साक्षर हो सके, बल्कि सुसंस्कारित व आत्मावलंबी  भी  बने ।

  • शिक्षा  का  प्रसार 
  • पुस्तकालय, वाचनालय, प्रौढ़ शिक्षा, रात्रि पाठशालाएँ  
  • शिक्षा विद्या  के साथ जुड़े ।
  •  विद्यालयों में विचारक्रांति ।
  • बाल संस्कारशालाएँ ।
  • कामकाजी विद्यालय योजना ।
  • स्वयं को जीवन के श्रेष्ठ मूल्यों के लिए प्रेरित करें ।
  • युग साहित्य का  स्वाध्याय एवं सत्संग करें ।
  • ज्ञान आचरण में कितना उतरा ? समीक्षा करें ।
  • भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा एवं विद्यालयों में संस्कृति मंडल का गठन । 


(3) स्वास्थ्य— रुग्णता रोकने के उपाय जीवनशैली में परिवर्तन कर विकसित करना,  इस आंदोलन का उद्देश्य है — 

  • सुख को स्वास्थ्य पर हावी न होने दें ।
  • स्वास्थ्य के सूत्रों को अभ्यास में लाएँ ।
  • आहार-विहार, चिंतन, चरित्र, श्रम, विश्राम का संतुलन बनाएँ ।
  • योग, व्यायाम, प्राणायाम आदि को दिनचर्या में लाएँ ।
  • संयम बरतें एवं जड़ी-बूटी चिकित्सा अपनाएँ ।
  • स्वच्छता बढ़ाएँ ।
  • शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्यों को साधें । 


(4) स्वावलंबन — 

  • हमारे कृषि प्रधान देश में आर्थिक क्रांति ग्राम केंद्रित करके बनाई गई योजनाओं द्वारा ही आएगी ।
  • स्वावलंबन की मनोवृत्ति ।
  • श्रम का सम्मान ।
  • स्वयं सहायता, बचत समूह, कुटीर उद्योग, ग्रामोद्योग, गोपालन ।
  • कमजोर वर्ग का शोषण न हो, श्रम और कौशल का लाभ मिले । समझदार और समर्थ उन्हें प्रेरणा दें । 


(5) पर्यावरण —  हरीतिमा-संवर्द्धन और कचरे की व्यवस्था ।

  • प्रकृति के यज्ञीय चक्र (इकोलॉजिकल बैलेंस) के प्रति आस्था,  अनगढ़ सुख-व्यसन, फैशन के लिए प्रकृति पर चोट न हो ।
  • कचरे का निस्तारण ।
  • दैवी आपदाएँ, बाढ़, भूकंप, दुर्भिक्ष को कम करने के लिए वृक्ष लगाना, यज्ञ द्वारा प्रदूषण को कम करना, शिक्षकों, छात्रों को प्रशिक्षण, स्मृति उपवन की स्थापना ।
  • सामाजिक जागरूकता, प्रशिक्षण एवं व्यवस्था तंत्र विकसित करें । 


(6) नारी जागरण — महिलाओं में आत्मगौरव का जागरण उनका परिपूर्ण शिक्षण ।

  • योग्यता का विकास
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वावलंबन, सुरक्षा और सुसंस्कार
  • आत्मगौरव का बोध, आत्मविश्वास
  • सोने की जंजीरों से मुक्ति ।
  • बेटा-बेटी को एक जैसा मानें
  • बेटी-बहू का अंतर मिटे
  • नारी की नारी के प्रति संवेदना जागे ।
  • क्षेत्रीय नारी संगठन बनें-नारी को आगे बढ़ाएँ ।
  • जगह-जगह सार्थक आयोजन हों, जिनकी पूरी व्यवस्था महिलाएँ सँभालें । 


(7) व्यसन मुक्ति, कुरीति उन्मूलन— तंबाकू, शराब, पान मसाला, गुटखा, मादक औषधियों का प्रचलन रोकें ।

  • ‘व्यसन से बचाएँ-सृजन में लगाएँ, युवाशक्ति को राष्ट्रनिर्माण में लगाएँ ।
  • कुरीतियों, व्यसनों से समय, श्रम, साधन, स्वास्थ्य बचाएँ, सृजन में लगाएँ । 
  • त्याज्य परंपराएँ क्यों पनप रही हैं, विचार करें ।
  • उपजाति का भेद मिटे ।
  • भिक्षा व्यवसाय समाप्त हो ।
  • मृतक भोज, जेवर का प्रचलन बंद हो, दहेज, फजूलखरची जैसी कुरीतियाँ बंद हों ।
  • व्यसनों से हानि का बोध ।
  • साधना से संकल्प ।
  • औषधियों और सामाजिक दबाव का प्रयोग हो ।
  • महिलाओं-बच्चों को प्रेरित करें, सत्याग्रह करें ।
  • विद्यालयों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, संप्रदायों को प्रेरित, सक्रिय करें ।
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