स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ् मय  तप उच्यते। अर्थात स्वाध्याय करना ही वाणी का तप है । —गीता 17/15

देव संस्कृति विश्वविद्यालय,शांतिकुंज, हरिद्वार (उत्तराखंड)

हरिद्वार से सात किलोमीटर दूर ॠषिकेश मार्ग पर शांतिकुंज से मात्र आधा किलोमीटर दूर प्राकृतिक सुषमा से युक्त भू-क्षेत्र पर यह विद्या मंदिर बहुत बड़े क्षेत्र में फैला है।

प्राचीन गुरुकुल परंपरा पर आधारित ॠषियों की प्राण-ऊर्जा एवं सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत महामानव गढ़ने हेतु संकल्पित एक स्थापना है— देव संस्कृति विश्वविद्यालय। जो उत्तराखंड सरकार के अधिनियम द्वारा स्थापित एवं वेदमाता गायत्री ट्रस्ट, शांतिकुंज, हरिद्वार द्वारा संचालित है।

पूज्य गुरुदेव की आकांक्षा की पूर्ति हेतु देव संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना राष्ट्र के युवाओं को निखार-सँवारकर उन्हें श्रेष्ठतम नागरिक, समर्पित स्वयंसेवक, प्रखर राष्ट्रभक्त एवं विषय विशेषज्ञ बनाने के साथ-साथ महामानव और देवमानव बनाने के पावन उद्देश्य से की गई है।

विश्वविद्यालय के मुख्य उददेश्य निम्नलिखित हैं—

  1. देव संस्कृति के विकास हेतु अथक प्रयास।
  2. देव संस्कृति पर आधारित ज्ञान की धाराएँ—धर्म, दर्शन, संस्कृति आदि पर आधारित पाठ्यक्रमों का शिक्षण एवं इनके समसामयिक बिंदुओं पर शोध।
  3. देव संस्कृति पर आधारित विज्ञान की धाराओं—गणित, ज्योतिष, आयुर्वेद, मंत्र विज्ञान, योग विज्ञान, मनोविज्ञान आदि से संबंधित पाठ्यक्रमों का अध्यापन एवं इनके समसामयिक बिंदुओं पर वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में शोध।
  4. गुरुदेव के विचारों पर आधारित नवीन सामाजिक संरचना के लिए आवश्यक रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का शिक्षण, आपदा प्रबंधन, ग्राम प्रबंधन, विद्यालयी प्रबंधन आदि पर अध्यापन एवं शोध।

शिक्षा, स्वास्थ्य, साधना और स्वावलंबन—इन चारों संकायों के अंतर्गत मनोविज्ञान, योग, संगीत, पत्रकारिता, ग्रामीण प्रबंधन, स्वास्थ्य संरक्षण आदि अनेक विषयों पर पाठ्यक्रम चल रहे हैं।

आधुनिक लाइब्रेरी—यहाँ पर बहुमंजिला आधुनिक लाइब्रेरी बनाई गई है। जो पूर्णत: कंप्यूटरीकृत है।

 

बी.ए. / बी. एस-सी.

3 वर्ष

अनिवार्य विषय (बी.ए. एवं बी.एस-सी.) जीवन प्रबंधन, वैज्ञानिक अध्यात्म, अँगरेजी संवाद / संस्कृत संवाद

 

वैकल्पिक विषय (बी.ए.) योग, मनोविज्ञान, अँगरेजी साहित्य, पर्यटन, भारतीय इतिहास एवं संस्कृति, शिक्षाशास्त्र, संस्कृत साहित्य, हिंदी साहित्य, गायन

 

वैकल्पिक विषय (बी.एस-सी.) योग विज्ञान, मनोविज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, गणित, पर्यावरण विज्ञान

 

नए शैक्षिक सत्र में सी.बी.सी.एस. के अनुसार विषय संख्या में परिवर्तन संभव

 

बी. सी. ए. (बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन)

3 वर्ष

स्नातकोत्तर उपाधि पाठ्यक्रम

2 वर्ष

एम. ए. / एम. एस-सी. (नैदानिक मनोविज्ञान)

 

एम. ए. (व्यावहारिक योग एवं मानव उत्कर्ष)

 

एम. ए. (व्यावहारिक शिक्षा)

 

एम. ए. (पत्रकारिता एवं जनसंचार)

 

एम. ए. (भारतीय इतिहास एवं संस्कृति)

 

एम. टी. टी. एम. (ट्रैवल एवं टूरिज्म प्रबंधन)

 

एम. ए. (संस्कृत)

 

एम. ए. (हिंदी)

 

एम. एस-सी. (कंप्यूटर साइंस)

 

एम. एस-सी. (योग विज्ञान एवं समग्र स्वास्थ्य)

 

एम. एस-सी. (पर्यावरण विज्ञान)

 

एम. ए. / एम. एस-सी. (मानव चेतना एवं योग विज्ञान)

 

एम. एस-सी. (एप्लाइड मेडिसिनल प्लांट साइंसेज)

 

पंचवर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स

5 वर्ष

बी. ए. + एम. ए. / बी. एस-सी. + एम. एस-सी.

 

डिप्लोमा पाठ्यक्रम

1 वर्ष

पी. जी. डिप्लोमा पत्रकारिता एवं जनसंचार, पी. जी. डिप्लोमा मानव चेतना, योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा, स्वउद्यमिता एवं ग्राम्य विकास, एडवांस डिप्लोमा इन विजुअल इफेक्ट्स

 

थ्री डी कंप्यूटर ग्राफिक्स

2 वर्ष

बी. एस-सी. एनिमेशन

3 वर्ष

बी. ए. पत्रकारिता एवं जनसंचार

3 वर्ष

बी. एड. (बेचलर ऑफ एजूकेशन)

2 वर्ष

प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम

6 माह    

समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन, धर्म विज्ञान, योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा, जल संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन, हस्तकरघा प्रौद्योगिकी

 

प्रमुख पाठ्यक्रम—

संपर्क सूत्र—
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार
फोन नं० (01334) 260723, 261367
फैक्स : 91-1334-260866
ई-मेल : registrar@dsvv.org
वेबसाइट : www.dsvv.ac.in

 

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