भावन्त:वा इमां पृथिवी वित्तेन पूर्णमद तल्लोकं जयति त्रिस्तावन्तं  जयति भूयां सेवाक्षम्यय एवं विद्वान अहरह स्वाध्यायमधीते। —शतपथ ब्राह्मण

युग निर्माण योजना पत्रिका अखण्ड ज्योति की पूरक

अखण्ड ज्योति पत्रिका एक विचार प्रधान पत्रिका है। इसका उद्देश्य भावनात्मक मनोभूमि का निर्माण करना है, दर्शन, अध्यात्म, विज्ञान और धर्म उसके विषय हैं। रचनात्मक प्रवृत्तियों का व्यावहारिक स्वरूप भी यदि इसी पत्रिका में दिया जाता तो इसके थोड़े से पन्नों में यह संभव न हो पाता। इसलिए दूसरी पत्रिका युग निर्माण योजना का प्रकाशन प्रारंभ करना पड़ा। इसमें आदर्शवादी आस्थाओं को कार्यरूप में परिणत करने का व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया जाता है।

अखण्ड ज्योति के पाठक सामान्य रूप से आत्मनिर्माण में ही अधिक रुचि रखते थे और उसी ढंग से सोचने- करने में संतुष्ट रहते थे। युग निर्माण योजना पत्रिका से उन्हें नई दिशा मिली। उन्होंने समाज निर्माण के कार्य को भी ईश्वर-उपासना मानना प्रारंभ किया।

युग निर्माण योजना में ऐसे विचार दिए जाते हैं, जो पाठक को युगानुकूल कर्म करने की प्रेरणा दें। अखण्ड ज्योति पत्रिका यदि श्रीकृष्ण है तो युग निर्माण योजना पत्रिका धनुर्धर अर्जुन है और प्रज्ञा अभियान पाक्षिक संजय है। ये तीनों एकदूसरे की पूरक हैं। इन तीनों का त्रिवेणी संगम ज्ञान – कर्म – प्रचार के माध्यम से युग निर्माण आंदोलन को पूर्णता की ओर ले जाता है। जिन्होंने भी युग निर्माण योजना का स्वाध्याय किया है उनके मन में यह हलचल और उमंग अवश्य उठती है कि जीवन को मात्र पेट- प्रजनन तक सीमित रखा गया तो अंत में पश्चात्ताप ही करना होगा। आशा है इस पत्रिका के पाठक आपकी मनःस्थिति को उत्कृष्ट बनाएँगे और स्वयं को लोकसेवा के कार्यों में नियोजित करेंगे, ज्ञान को कर्म में परिणत करेंगे।

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