हिमालय के सूक्ष्म ॠषियों की दिव्य इच्छा को पूरा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण की पावन जन्मस्थली मथुरा से पूरे देश में युग निर्माण योजना का आगाज करने वाले आचार्यश्री गायत्री तपोभूमि मथुरा को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर हरिद्वार आ गए और उन्होंने यहाँ सप्त-सरोवर क्षेत्र में शांतिकुंज आश्रम की स्थापना की। डेढ़ एकड़ क्षेत्र से शुरू हुआ यह आश्रम आज 150 एकड़ क्षेत्र में फैला है और देश के कोने-कोने तथा दुनिया के 80 से अधिक देशों के करोड़ों लोगों के गायत्री परिवार के मुख्यालय के रूप में इसने ख्याति प्राप्त की है। हरिद्वार को गायत्री तीर्थ के रूप में इस आध्यात्मिक केंद्र का मिलना धर्मनगरी, कुंभनगरी का बड़ा सौभाग्य है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय भी उन्हीं के दिव्य स्वप्नों की फलश्रुति है।
यह गुरुद्वारा अनेकानेक रचनात्मक कार्यक्रम चलाकर लोक-सेवा के कार्य करता है, यही शांतिकुंज की विशेष पहचान है। उनकी एक विशेषता यह थी कि वह एक बार मिलने पर ही सदा-सदा के लिए व्यक्ति को अपना बना लेते थे। अनेक महानुभाव समय-समय पर आते रहे, उनके भाव उद्गार—
“डॉ० ए० पी० जे० अब्दुल कलाम” (भारत के राष्ट्रपति)
‘‘मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग 3,000 पुस्तकों के लेखक पं० श्रीराम शर्मा आचार्य के स्वप्न को साकार किया है। उन्हें भारत में ज्ञानक्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा।.......आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता, निर्धनता और बीमारी सभी समस्याओं की जड़ है, अत: इनसे छुटकारा पाना होगा। इस कार्य को डॉ० प्रणव पण्ड्या पूर्ण कर रहे हैं, यह संतोष का विषय है।’’ (दिसंबर, 2006 में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में)
“श्री अटल बिहारी वाजपेयी” (भारत के प्रधानमंत्री)
‘‘इस आध्यात्मिक आंदोलन से सभी को प्रेरणा प्राप्त हो रही है। प्रसन्नता की बात है कि यह संस्था पीड़ितों की सहायता में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।’’
“जस्टिस श्री वी० रामास्वामी” (मुख्य न्यायाधीश, पंजाब)
‘‘इधर काफी अरसे से महसूस हो रहा था कि जैसे जीवन मुझसे बिछड़ गया है। सब कुछ खोया-खोया, सूना-सूना लग रहा था। आज शांतिकुंज में बैठकर लगा कि मेरा जीवन मुझे वापस मिल गया।’’
“श्री मो० शफी कुरैशी” (राज्यपाल, मध्य प्रदेश )
‘‘गायत्री परिवार एकता और समता की राष्ट्रीय भावनाओं को फैला रहा है। उसे हर जगह सुना जा सकता है और सुना जाएगा। आप भी अपनी झोली भर ले जाएँ और खुशहाली सारे आलम में बाँट दें।’’
(30 जनवरी, 1995 संस्कारधानी जबलपुर, मध्य प्रदेश में)
“श्री सुंदरलाल बहुगुणा” (प्रख्यात समाजसेवी पर्यावरणविद्)
‘‘यह केंद्र वैज्ञानिकों, समाज-आंदोलनकारियों, करुण हृदय साहित्यकारों, कलाकारों एवं पत्रकारों के लिए प्रेरणा का केंद्र है। मेरी इच्छा है कि इन विविध विधाओं के मर्मज्ञ यहाँ आएँ और सीखें कि अपनी प्रतिभा एवं विशिष्ट क्षमता को नवनिर्माण के लिए नियोजित करने की सही तकनीक क्या है?’’
“श्री यशपाल जैन” (प्रख्यात साहित्यकार एवं सस्ता साहित्य मंडल के मंत्री)
‘‘शांतिकुंज संस्थान को देखकर मुझे अनिर्वचनीय आनंद की अनुभूति हुई। लोकमंगल के लिए प्रयत्नशील इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पास अनमोल मानव संपदा है। वस्तुत: इसके पीछे आचार्य जी की अथक एवं दूरदर्शितापूर्ण साधना है। यहाँ से सादगी, सरलता, सात्त्विकता की त्रिवेणी प्रवाहित है।’’
“डॉ० एम० लक्ष्मी” (अध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी)
‘‘भारत परिक्रमा के अवसर पर पहली बार शांतिकुंज आने का सुयोग प्राप्त हुआ। लगा कि जीवन के सभी पुण्यों का पारितोषिक मिल गया।’’
“स्वामी अवधेशानंद गिरि”
‘‘शांतिकुंज परिवार मानव मूल्यों एवं मानवोत्थान हेतु संकल्पित विश्वस्तर पर ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के स्वर के साथ निरंतर अग्रसर हो रहा है।’’
“श्री स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि”
‘‘ॠषिकल्प, संकल्पसिद्ध वेदमूर्ति आचार्य जी की प्रेरणा से स्थापित देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज द्वारा प्राचीन संस्कृति का रक्षण अर्वाचीन वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में हो रहा है, जो प्रशंसनीय है। यह नूतन युग निर्माण में सहायक होगा। परमसत्ता इस संस्था के साथ है।’’
“डॉ० श्री रमन सिंह” (मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़)
‘‘नक्सली हिंसा में बेसहारा हुए बच्चों की शिक्षा एवं पुनर्वास की व्यवस्था करने के लिए युग निर्माण मिशन आगे आया है। यह सचमुच सराहनीय, स्वागत योग्य पहल है।’’
“श्री के० रामाराव” (नेशनल हेरल्ड के संपादक)
‘‘पहली पंक्ति में लड़ने वाले सिपाही के तौर पर सैनिक ‘समाचार’ ने इतने प्रहारों और आघातों को सहा कि इसका जीवित रह जाना एक आश्चर्यजनक घटना है। इसके पीछे ऐसे योग्य व वीर पुरुष रहे हैं, जिन्होंने कभी पराजय स्वीकार नहीं की।’’
“पद्मभूषण डॉ० के० जे० एसुदास” (प्रसिद्ध गायक)
‘‘दक्षिणी प्रांतों से मूढ़-मान्यताओं को हटाने के लिए गायत्री परिवार को अपनी सेवाएँ देने को तैयार हूँ।’’
“श्री दिग्विजय सिंह” (मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री)
‘‘.....स्कूलों में आज ऐसी विद्या की आवश्यकता है, जो विद्यार्थियों में नैतिकता के संस्कार डाल सके और यह कार्य गायत्री परिवार ही कर सकता है।’’
"श्री बाला साहब देवरस"
"लोपामुद्रा, अनसूया जैसी महिला ॠषियों के बारे में अब तक पढ़ता सुनता रहा हूँ । शांतिकुंज आने पर वंदनीया माताजी के रूप में उस ॠषितत्त्व का साक्षात्कार भी कर लिया । वे और आचार्य जी मानव जाति के कल्याण के लिए जैसी शिक्षा दे रहे हैं, उसकी अत्यंत आवश्यकता है ।"
"श्री अर्जुन सिंह" (मानव संसाधन एवं विकास मंत्री, भारत सरकार)
"मानव कल्याण के लिए वंदनीया माताजी जो कर रही हैं, उसमें सहयोग तो दिया जा सकता है, उसके विस्तार को नापा नहीं जा सकता ।"
"श्री छबील दास मेहता" (मुख्यमंत्री, गुजरात)
"वंदनीया माताजी की दिव्य प्रेरणा शांतिकुंज के कण-कण में समायी है, गायत्री परिवार उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य प्रवाह है ।"
"श्री मोहन भागवत" (संघ संचालक)
"युगॠषि परमपूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी का व्यक्तित्व, अपनी इस प्राणप्रिय मातृभूमि भारतवर्ष की सेवा तथा पुनरुत्थान के लिए नियुक्त दिव्य आत्माओं की विस्तृत श्रेणी में मूर्धन्य है ।"
"श्री नरेंद्र मोदी" (प्रधानमंत्री, भारत सरकार)
"पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने स्वतंत्रता के बाद सुराज्य की स्थापना के आदर्श को कार्यान्वित करने की दिशा में आध्यात्मिक एवं नैतिक उत्थान के लिए युग निर्माण योजना का शुभारंभ किया । उन्होंने क्रांतिकारी विचार फैलाने के साथ गायत्री महामंत्र को सर्वसुलभ बनाने का बहुत बड़ा युगकार्य किया है। पूज्य माता भगवती देवी शर्मा जी के सान्निध्य में मुझे शांतिकुंज-हरिद्वार के आश्रम में रहने का सौभाग्य मिला है। महिला जाग्रति अभियान, स्त्री भ्रूण हत्या विरोधी अभियान, साक्षरता अभियान, कुरीति उन्मूलन सहित स्वस्थ समाज, सभ्य समाज के निर्माण के लिए गायत्री परिवार के माध्यम से हो रही प्रवृत्तियाँ सराहनीय हैं।"
"श्री शिवराज सिंह चौहान" (भारत के केंद्रीय कृषिमंत्री)
"युग निर्माण योजना के निर्माता और गायत्री परिवार के प्रणेता परमपूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा जी का पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा का अनुकरणीय उदाहरण रहा है ।"
"श्री पी० वी० नरसिम्हा राव" (प्रधानमंत्री, भारत सरकार)
"देश के नागरिकों के आचरण बदलने से, वहाँ के राष्ट्र की आंतरिक संरचना में बदलाव आता है । यह किसी प्रेरक शक्ति के स्थापित प्रतिमानों के आत्मसात् करने से ही संभव है। बदलाव धनात्मक दिशा में आगे बढ़कर जनकल्याण के गलियारों से होता है, तब एक कीर्तिमान स्थापित हो जाता है। ऐसे ही कीर्तिमान स्थापित करने में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा स्थापित गायत्री परिवार की प्रबल भूमिका सामने आ रही है ।"
"श्री नारायण दत्त तिवारी" (मुख्यमंत्री, उत्तराखंड)
"मुझे इस महान विश्वविद्यालय (देव संस्कृति विश्वविद्यालय) के कुलपिता, ब्रह्मर्षि, त्यागमूर्ति एवं उद्भट विद्वान परम श्रद्धेय पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी का दर्शन करने का दो बार सौभाग्य मिला । मैं उनकी वाणी सुनकर धन्य हो गया । उनकी वाणी और लेखनी का प्रभाव युगों-युगों तक जनमानस का पथ प्रदर्शन करता रहेगा ।"
" श्री अनंत शयनम आयंगर" (लोकसभा अध्यक्ष)
"आचार्य जी ने भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के सच्चे स्वरूप को जनसामान्य के समक्ष रखा है। उनके प्रयत्नों से भारतीय संस्कृति उच्चतम शिखर को छुएगी । भारतवासी पुनः अपने प्राचीन गौरवपूर्ण जीवन जीने को प्रेरित होंगे ।"
"महंत श्री अवैद्यनाथ"
"हम बदलेंगे, युग बदलेगा - हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा” – जैसी अमृतवाणी के सृष्टिकर्त्ता, गायत्री परिवार, युग निर्माण मिशन तथा प्रज्ञा अभियान के जनक आचार्यश्री निश्चित रूप से एक महामानव थे। आज भारत नहीं, अपितु विदेशों में भी गायत्री परिवार अपनी धर्म-ध्वजा फहराकर हिंदुत्व का अलख जगा रहा है । वस्तुतः गायत्री महाविज्ञान की रचना करके आचार्य जी अमर हो गए।"
"श्री अशोक सिंघल" (विश्व हिंदू परिषद्)
"पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने युग निर्माण योजना के द्वारा समाज में प्रचलित दुष्प्रवृत्तियों, कुरीतियों के विरुद्ध लड़ने एवं समाज को नई दिशा देने का संकल्प लिया, जिससे करोड़ों लोगों की जीवन दिशा ही बदल गई ।"
"श्री राजनाथ सिंह " (रक्षामंत्री, भारत सरकार)
"पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की गिनती बीसवीं सदी के प्रख्यात विचारकों एवं मनीषियों में होती है, जिन्होंने अपने जीवन काल में अपने व्यक्तित्व एवं कृतित्व से लाखों लोगों को प्रेरणा दी हैं।"
"श्री नितिन गडकरी" (परिवहन मंत्री, भारत सरकार)
"पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने अपने सेवापूर्ण जीवन से आध्यात्मिकता, धर्मपरायणता द्वारा युग निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।"
"श्री प्रेम कुमार धूमल" (मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश)
"पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने युग निर्माण योजना एवं गायत्री परिवार की स्थापना कर भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है । आचार्य जी ने अपना जीवन राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रखा और समाज में नवचेतना का सृजन किया ।"
"डॉ० रमेश पोखरियाल" (मुख्यमंत्री, उत्तराखंड)
"पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी का हिमालय तपस्थली ही नहीं, कर्मस्थली भी रहा है । उनके द्वारा स्थापित शांतिकुंज की विश्वविख्यात प्रसिद्धि पूरे देश को गौरव प्रदान कर रही है ।"
"श्री अर्जुन मुंडा" (मुख्यमंत्री, झारखंड)
"पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के माध्यम से जो सांस्कृतिक क्रांति की मसाल जलाई है, वह अपने आप में अद्वितीय है । युगॠषि पूज्य गुरुदेव की युग निर्माण योजना न केवल भारत राष्ट्र, बल्कि विश्व में नैतिक युग के आह्वान का सात्त्विक यज्ञ है ।"
"श्री नानाजी देशमुख" (भारत रत्न)
"मैं आचार्य जी के विचारों से बहुत प्रभावित हूँ। उनका चिंतन अपने राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने एवं मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करने में सक्षम है ।"