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गायत्री तपोभूमि – युगनिर्माण योजना
स्वाध्याय से बढकर आनंद कुछ नहीं। —गांधी जी

गायत्री माता की आरती

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

आदिशक्ति तुम अलख निरंजन, जग पालन क‌र्त्री।
दु:ख शोक भय क्लेश कलह, दारिद्रय दैन्य हर्त्री॥ जयति ..

ब्रह्मरूपिणी प्रणतपालिनी, जगत्‎धातृ अम्बे।
भवभयहारी जनहितकारी, सुखदा जगदम्बे॥ जयति ..

भयहारिणि भवतारिणि अनघे, अज आनन्द राशी।
अविकारी अघहरी अविचलित, अमले अविनाशी॥ जयति ..

कामधेनु सत् चित्‌ आनन्दा, जय गंगा गीता।
सविता की शाश्वती शक्ति, तुम सावित्री सीता॥ जयति ..

ॠग् यजु साम अथर्व प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे।
कुण्डलिनी सहस्रार सुषुम्ना, शोभा गुण गरिमे॥ जयति ..

स्वाहा स्वधा शची ब्रह्माणी, राधा रुद्राणी।
जय सतरूपा वाणी विद्या, कमला कल्याणी॥ जयति ..

जननी हम हैं दीन हीन, दु:ख दारिद के घेरे।
यदपि कुटिल कपटी कपूत, तऊ बालक हैं तेरे॥ जयति ..

स्नेहसनी करुणामयि माता, चरण-शरण दीजै।
बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे, दया दृष्टि कीजै॥ जयति ..

काम क्रोध मद लोभ दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिए।
शुद्ध-बुद्धि निष्पाप हृदय, मन को पवित्र करिए॥ जयति ..

तुम समर्थ सब भाँति तारिणी, तुष्टि-पुष्टि त्राता।
सत मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता॥

ॐ स्तुता मया वरदा वेदमाता प्रचोदयन्तां पावमानी द्विजानाम् । आयु:  प्राणं  प्रजां  पशुं  कीर्तिं  द्रविणं  ब्रह्मवर्चसम् । मह्यं दत्त्वा व्रजत ब्रह्मलोकम् ।                                                                                                                                                                                                                            — अथर्व० 19.71.1

हम साधकों द्वारा स्तुत (पूजित) हुई, अभीष्ट फल  प्रदान करने वाली, वेदमाता (गायत्री) द्विजों को पवित्रता और प्रेरणा प्रदान करने वाली हैं । आप हमें दीर्घ  जीवन,  प्राणशक्ति,  सुसंतति,  श्रेष्ठ  पशु  (धन),  कीर्ति,  धन-वैभव   और   ब्रह्मतेज  प्रदान   करके   ब्रह्मलोक   के   लिए   प्रस्थान   करें ।

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