Severity: Warning
Message: fopen(/tmp/ci_sessione2a95bb6dc4da282118cbe2013b956fa71789b03): failed to open stream: Disk quota exceeded
Filename: drivers/Session_files_driver.php
Line Number: 177
Backtrace:
File: /home/kkjbnlfz/yugnirmanyojna.org/index.php
Line: 315
Function: require_once
Severity: Warning
Message: session_start(): Failed to read session data: user (path: /tmp)
Filename: Session/Session.php
Line Number: 137
Backtrace:
File: /home/kkjbnlfz/yugnirmanyojna.org/index.php
Line: 315
Function: require_once
पंडित श्रीराम शर्मा अपने ज्ञान, तप आचरण की उत्कृष्टता के कारण समाज में अत्यंत लोकप्रिय होते जा रहे थे, बहुत सारे लोग, उन्हें श्रद्धावश ‘आचार्य’ भी कहने लगे थे। ऐसे समय में देश के प्रतिष्ठित विद्वानों ने समारोहपूर्वक ‘आचार्य’ की उपाधि से उन्हें विभूषित करने का निर्णय किया।
इसके लिए ॠषिकेश से स्वामी सच्चिदानंद, वाराणसी से पंडित शिव शंकर द्विवेदी, रामानुज उपाध्याय तथा शैव संत भोले बाबा, प्रयाग से पंडित लक्ष्मीकांत आदि विद्वान मथुरा आए। स्वामी सच्चिदानंद ने भूमिका बनाते हुए कहा, आपने (पंडित श्रीराम) तप-साधना का लंबा दौर पूरा करके ॠषित्व प्राप्त कर लिया है, अब आपको अपने आचार से भी लोगों को शिक्षित और संस्कारित करना है, अतः अब यह उचित होगा कि आप आचार्य के नाम से आगे जाने जाएँ।
सभी विद्वानों ने स्वामी सच्चिदानंद के निर्णय का समर्थन किया, इस आयोजन में मथुरा-वृंदावन के कुछ प्रमुख साधु-संत भी सम्मिलित हुए, जिनमें विट्ठल चतुर्वेदी, प्रोफेसर अवध शरण, स्वामी शरणानंद (मानव सेवा संघ, वृंदावन), अनंत विहारी गोस्वामी आदि थे। इन सभी की उपस्थिति में पंडित श्रीराम शर्मा को पीला दुपट्टा उढ़ाया गया, स्वस्तिवाचन आदि वैदिक क्रम संपन्न किए गए। पंडित श्रीराम शर्मा के लिए “आचार्य” की उद्घोषणा के साथ पूरे वातावरण में देव शक्तियों का जय घोष गुंजित होने लगा। पट्टाभिषेक के इस परम पुनीत आयोजन में उपस्थित सभी परिजनों ने अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। किसी ने पुष्पमाला पहनाई, किसी ने आचार्य जी को तिलक किया, पुष्प-वर्षा भी होती रही तथा श्रद्धालुओं द्वारा उनके चरणों में पुष्प भी अर्पित किए जाते रहे। सभी को अपार प्रसन्नता थी, क्योंकि उनके प्रिय-पूज्य पंडित श्रीराम अब “आचार्य श्रीराम” के रूप में सुशोभित हो रहे थे।