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Line: 315
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Filename: Session/Session.php
Line Number: 137
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Line: 315
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परमपूज्य गुरुदेव ने 4 वेद, 6 शास्त्र, (दर्शन), 18 पुराण, 108 उपनिषद्, योगवासिष्ठ आदि ग्रंथों का सरल हिंदी में भाष्य किया। इनके अलावा लगभग 3200 पुस्तकें (छोटी-बड़ी) उन्होंने लिखीं। उनके साहित्य का प्रमुख प्रकाशन केंद्र गायत्री तपोभूमि ही है। वर्तमान में उनकी लिखी पुस्तकों में से हज़ारों पुस्तकें यहाँ से प्रकाशित हो रही हैं। गायत्री तपोभूमि में पुस्तकों के विक्रय की समुचित व्यवस्था की गई है। यहाँ विशाल साहित्य केंद्र स्थापित है, उसके तीन मंजिल भव्य भवन में जीवन के लिए उपयोगी विषयों पर सभी वर्गों के लिए हिंदी, अँगरेजी, गुजराती, मराठी, बँगला, उड़िया, तमिल, कन्नड़, नेपाली आदि विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में साहित्य, सद्वाक्य पोस्टर, चित्र, स्टीकर, धूपबत्ती, अगरबत्ती, ऑडियो, डीवीडी, पेनड्राइव आदि प्रचार सामग्री लागत मूल्य पर उपलब्ध है |