स्वाध्याय योग युक्तात्मा परमात्मा प्रकाशते। अर्थात स्वाध्याययुक्त साधना से ही परमात्मा का साक्षात्कार होता है ।—महर्षि व्यास

ॠषिसत्ता का जीवन दर्शन (प्रदर्शनी)

गायत्री तपोभूमि, मथुरा महर्षि दुर्वासा एवं महर्षि अंगिरा की तपस्थली है । इस भूमि के प्रसुप्त संस्कारों को पूज्य गुरुदेव ने पुनर्जाग्रत किया। इस पवित्र प्रांगण में गुरुदेव- माताजी की जीवन यात्रा एवं उनके द्वारा किए गए पुरुषार्थ को रंगीन सुंदर पोस्टर्स के माध्यम से प्रदर्शित करने का प्रयास एक प्रदर्शनी में किया गया है। इसे “ॠषिसत्ता का जीवन दर्शन” के नाम से जाना जाता है। इसमें गुरुसत्ता के जन्म से महाप्रयाण तक तथा बाद में होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों को पोस्टर्स के माध्यम से दिखाया गया है।

नए परिजन इस प्रदर्शनी को देखकर गुरुदेव- माताजी के जीवन के प्रेरणाप्रद प्रसंगों को समझ पाते हैं, जिससे उनके हृदय में गुरुसत्ता के प्रति श्रद्धा उत्पन्न होती है। किसी महापुरुष का जीवन ही उसका संदेश होता है। पूज्य गुरुदेव ने जो कहा, वह करके भी दिखाया। यहाँ आने वाले परिजनों की प्रदर्शनी में बहुत रुचि है यह भव्य प्रदर्शनी सबके लिए दर्शनीय है।

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