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क्या कुछ नहीं समाया था वंदनीया माताजी के व्यक्तित्व में। आदर्श गृहिणी, वात्सल्यमयी माँ, उत्कट तपस्विनी, आध्यात्मिक शक्तियों की दिव्य स्रोत, ओजस्वी वक्ता एवं कुशल व्यवस्थापिका आदि न जाने कितने रूपों में वह अपना प्रकाश बाँटती-बिखेरती रहीं। जिनके हाथ में देश और समाज ने अपनी बागडोर सौंपी है, वे सब भी माताजी के सामाजिक-सांस्कृतिक अनुदानों की चर्चा करते नहीं थकते।
विशिष्टजनों की बहुरंगी स्मृतियों की हलकी-सी झाँकी नीचे प्रस्तुत की जा रही है —
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श्री भैरों सिंह शेखावत (उपराष्ट्रपति) — "जहाँ से आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक शक्ति का प्रवाह निरंतर बहता रहता है, उनका नाम ही माताजी है।" |
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श्री अटल बिहारी वाजपेयी (प्रधानमंत्री) — "मानवीय संवेदना अगर घनीभूत हो जाए, तो कैसी होगी, यह माताजी को देखकर पता चला। उनके द्वारा चलाया गया अश्वमेध अभियान राष्ट्र निर्माण का वेगपूर्ण प्रवाह है।" |
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डॉ० एम० चेन्ना रेड्डी (राज्यपाल, उत्तर प्रदेश) — "भगवान से मेरी प्रार्थना है कि आचार्य जी एवं माताजी की भावधारा से, उत्तर प्रदेश ही नहीं, समूचा देश और दुनिया परिचित-प्रभावित हो।" |
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श्री बी. सत्यनारायण रेड्डी (राज्यपाल, उत्तर प्रदेश) — "उनके द्वारा विश्वकल्याण के लिए किया जा रहा कार्य सर्वथा अद्वितीय है।" |
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श्री पुरुषोत्तम कौशिक (पर्यटन एवं उड्डयन मंत्री, भारत सरकार) — "वंदनीया माताजी के प्यार के आकर्षण ने उच्चशिक्षित एवं प्रतिभासंपन्न लोगों को भौतिकता का मोह छोड़कर शांतिकुंज आने एवं लोक-सेवा करने के लिए मजबूर किया है।" |
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श्री ब्रजलाल वर्मा (संचार मंत्री, भारत सरकार) — "शांतिकुंज न आता, तो पता भी न चलता कि नारी-शक्ति के विकास का सही स्वरूप क्या है। माताजी भारतीय नारी के आदर्शों की जीवंत मूर्ति हैं। स्नेह, ममत्व, करुणा, साहस, सेवा, सदाशयता सभी गुण तो उनमें हैं। उनसे एक बार मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए उनका अपना हो गया।" |
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श्रीमती सुषमा स्वराज (विदेश मंत्री, भारत सरकार) — "जिसने भी उनको एक बार देखा, जो भी उनसे एक बार मिला, उनका अपना हो गया। सही मायने में व्यक्तित्व-परिष्कार का पुनीत कार्य जो शांतिकुंज कर रहा है, बहुत ही सराहनीय है। वाणी और आचरण के अद्भुत संगम का नाम है—शांतिकुंज।" |
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श्री राजेंद्र प्रसाद शुक्ल (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश-विधानसभा) — "शांतिकुंज से चिंतन की एक नई दिशा सदैव मिलती रहती है। इसकी शक्ति, साधन एवं प्रेरणा की स्रोत वंदनीया माताजी हैं। जिनके चरणों में हमारे श्रद्धा-सुमन सदैव अर्पित होते रहेंगे।" |
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श्री गिरिराज प्रसाद तिवारी (अध्यक्ष, राजस्थान-विधानसभा) — "आध्यात्मिक-सामाजिक कार्य के साथ देश की अखंडता, एकता के लिए पूर्व ॠषियों तुल्य चिंतन, मनन एवं कार्यप्रणाली मेरी राय में शायद ही कोई अन्य कर रहा हो।" |
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श्री सत्येंद्र नारायण सिंह (मुख्यमंत्री, बिहार) — "उनका सारा कार्य देश को समृद्ध बनाने के लिए चल रहा है। मनुष्यमात्र का कल्याण उनका मुख्य अभीष्ट है।" |
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श्री अमर सिंह (मुख्यमंत्री, गुजरात) — "मानवी प्रेम का अगाध समुद्र उनमें लहराता है। उसके कुछ कणों को पाकर मैं अपने को बड़भागी मानता हूँ।" |
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श्री माधव सिंह सोलंकी (मुख्यमंत्री, गुजरात) — "मानवीय हित ही जिनका सब कुछ है, उनका नाम है—माताजी। वह सचमुच में माँ हैं, किसी एक की नहीं सभी की, सारे मनुष्यों की, तभी तो सबके कल्याण की चिंता करती रहती हैं।" |
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श्री श्रीपति मिश्र (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश) — "माताजी स्वयं में ज्योतिपुंज हैं और उनके कार्यकर्त्ता उनसे निकला हुआ प्रकाश।" |
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श्री दिग्विजय सिंह (मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश) — "उनके ममत्व पर मेरा अधिकार है। मानवीय हितों में एवं उनके हितों में किए जा रहे कार्य, विश्व-इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।" |
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श्री लालू प्रसाद यादव (मुख्यमंत्री, बिहार) — "मेरी माँ बचपन में ही मर गईं थीं। आज माताजी को देखकर ऐसा लगा कि फिर से मेरी माँ मुझे मिल गईं।" |
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श्री बीजू पटनायक (मुख्यमंत्री, उड़ीसा) — "सचमुच आप विश्वमाता हैं। उड़ीसा ही क्यों समस्त विश्व आपकी गोद में है।" |
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श्री भजन लाल (मुख्यमंत्री, हरियाणा) — "माताजी राष्ट्र की आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत हैं। उनके द्वारा प्रारंभ किया गया अश्वमेध अभियान राष्ट्र-निर्माण में अपनी सक्षम भूमिका निभाएगा, ऐसा मेरा विश्वास है।" |
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प्रो० राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) (सरसंघ चालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) — "माताजी ने अपने प्रेमपूर्ण वात्सल्य के सूत्र में अनेक लोकसेवी कार्यकर्त्ताओं की मणिमाला तैयार की है।" |
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श्री मुरली मनोहर जोशी (वरिष्ठ राजनेता, भारतीय जनता पार्टी) — "माताजी के सान्निध्य से स्फूर्ति, प्रेरणा एवं बल लेकर जा रहा हूँ। उनके पास आकर चेतना को नई शक्ति मिली।" |
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श्री सत्यप्रकाश मालवीय (मंत्री, उत्तर प्रदेश) — "शांतिकुंज आने पर प्रत्यक्ष हुआ कि यह आश्रम राष्ट्र-निर्माण के कार्यों में रत है। जिससे न केवल विश्व-निर्माण होगा, अपितु एक युग का नवनिर्माण होगा। मुझे माताजी के स्नेह भरे व्यवहार ने अत्यंत प्रभावित किया है।" |
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जस्टिस वी० रामास्वामी (मुख्य न्यायाधीश, पंजाब) — "उनके सान्निध्य में मुझे जीवन को नया आधार देने वाला अलौकिक तत्त्व-चिंतन मिला। उनका ममत्व मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी निधि बनी रहेगी।" |
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श्री सुंदरलाल बहुगुणा (प्रख्यात समाजसेवी, पर्यावरणविद्) — "माताजी के पास कुछ देर रहकर मैं शक्ति अर्जित करके जा रहा हूँ। उनके द्वारा संचालित यह केंद्र वैज्ञानिकों, समाज-आंदोलनकारियों, करुण हृदय साहित्यकारों, कलाकारों एवं पत्रकारों के लिए प्रेरणा का केंद्र है। मेरी इच्छा है कि इन विविध विधाओं के मर्मज्ञ यहाँ आएँ और सीखें कि अपनी प्रतिभा एवं विशिष्ट क्षमता को नवनिर्माण के लिए नियोजित करने की सही तकनीक क्या है?" |
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