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पुस्तक मेला

पुस्तक मेला

पूज्यवर के चिंतन से प्रभावित प्रबुद्ध समाज और युवा वर्ग पूज्यवर के सतयुगी संकल्पों को साकार करने में अपने क्षेत्र में पुस्तक मेला लगाकर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मेलों द्वारा ही पूज्यवर के विचारों को प्रत्येक के पास तक पहुँचाया जा सकता है। पुस्तक मेला से संबंधित जानकारी युग निर्माण योजना गायत्री तपोभूमि, मथुरा के पुस्तक मेला विभाग से की जा सकती है। 

पूज्यवर का एकसूत्रीय कार्यक्रम रहा है, जनमानस का परिष्कार। इसे ही सामाजिक भाषा में विचारक्रांति अभियान एवं आध्यात्मिक भाषा में ज्ञानयज्ञ कहा जाता है। पूज्यवर ने सूक्ष्मदृष्टि से यह भली भाँति समझ लिया था कि युग-परिवर्तन का मुख्य आधार विचार-परिवर्तन ही है। व्यक्ति-निर्माण से समाज-निर्माण और फिर इससे युग निर्माण होगा।

स्थायी परिवर्तन हेतु विश्वव्यापी विचार-परिवर्तन अनिवार्य है। आगामी युद्ध शस्त्रों से नहीं, कुविचारों को सद्विचारों की तलवार से काटकर ही जीते जाएँगे। इसके लिए पूज्यवररचित युगसाहित्य को जन-जन तक पहुँचाना वर्तमान समय का सबसे बड़ा धार्मिक अनुष्ठान एवं युगधर्म है। युग परिवर्तन की समग्र क्रांति पूज्य गुरुदेव के विचारों को अपनाने से ही संभव हो सकेगी। पुस्तक मेलों में इन आयोजनों से कोई क्षेत्र अछूता न रहे । जहाँ पहले पुस्तक मेले लग गए हैं, उन्हें अपने निकटवर्ती जिलों, तहसीलों, कस्बों व विद्यालयों में पुस्तक मेले आयोजित करने चाहिए। मेलों के समय उत्पन्न क्षेत्रीय जन-भावना को पोषित करते हुए इन मेलों को वार्षिक आयोजन के रूप में प्रतिवर्ष आयोजित करते रहना चाहिए।

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