स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ् मय  तप उच्यते। अर्थात स्वाध्याय करना ही वाणी का तप है । —गीता 17/15

विदाई समारोह

ॠषियुग्म का विदाई-सम्मेलन दिनांक 17 जून से 20 जून सन् 1971 तक गायत्री तपोभूमि, मथुरा में संपन्न हुआ। सहस्रकुंडीय महायज्ञों जैसा यह समागम था। लाखों व्यक्तियों ने अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें विदाई दी। पूज्य गुरुदेव तथा वंदनीया माताजी शांतिकुंज पहुँच गए। शांतिकुंज का निर्माण अभी पूरा नहीं हो सका था; उस अर्द्धनिर्मित भवन में ही पूज्य गुरुदेव व वंदनीया माताजी ने निवास बनाया।

©2026 All Rights Reserved.
युग निर्माण AI
×
नमस्कार! मैं युग निर्माण योजना का एआई असिस्टेंट हूँ। मैं आपकी कैसे सहायता कर सकता हूँ?