स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ् मय  तप उच्यते। अर्थात स्वाध्याय करना ही वाणी का तप है । —गीता 17/15

मातृसत्ता श्रद्धांजलि समारोह—दिल्ली

शांतिकुंज से 30 अक्टूबर, सन् 1994 को प्रात: सजल श्रद्धा-प्रखर प्रज्ञा के पास ही शक्ति कलश का पूजन कर शोभायात्रा प्रारंभ की गई। जो उसी दिन को तालकटोरा स्टेडियम देहली पहुँची, जहाँ एक भव्य आयोजन किया गया। देश भर से पधारे हजारों व्यक्तियों द्वारा मातृसत्ता को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में विशिष्ट अतिथि माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी (प्रधानमंत्री भारत सरकार), लोकसभा अध्यक्ष श्री शिवराज पाटिल, सांसद श्री नरेंद्र मोहन जी आदि सम्मिलित हुए। दिल्ली वासियों, अनेक मूर्द्धन्य नेताओं, समाजसेवियों ने भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित की। उसी शृंखला में आँवलखेड़ा में होने वाले ‘अर्द्धपूर्णाहुति अश्वमेध यज्ञ’ की कलश स्थापना का कार्यक्रम भी रखा गया।

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