स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ् मय  तप उच्यते। अर्थात स्वाध्याय करना ही वाणी का तप है । —गीता 17/15

जलपान गृह (कैंटीन)

गायत्री तपोभूमि परिसर में आने वाले परिजन, दर्शनार्थियों के लिए जलपान गृह के अंतर्गत स्वल्पाहार, प्रज्ञा पेय, चाय इत्यादि की व्यवस्था उचित मूल्य पर की गई है।

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